Future of Electric Vehicles in India

किसी भी देश का परिवहन तंत्र मानव शरीर की धमनियों के समान है जिसके अभाव में किसी भी देश की विकास यात्रा पूर्ण नहीं हो सकती है| बढ़ते हुए परिवहन संसाधन एक ओर विकास को सुगम बनाते है तो दूसरी ओर सड़क पर बढ़ते हुए वाहन विश्व में पर्यावरण प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन पर अतिनिर्भरता जैसी कई समस्याओ को भी जन्म दे रहे है| बढ़ता हुआ पर्यावरण प्रदूषण और जीवाश्म ईंधन के बढ़ते हुए दाम काफी चिंता का विषय है ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहनों को हरित ऊर्जा (Green Energy) के बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

क्या होते है इलेक्ट्रिक वाहन?

इलेक्ट्रिक वाहन आसान भाषा में हम ऐसे वाहनों को कहते हैं जो ईंधन के स्रोत के रूप में जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) के स्थान पर बैटरी से संचालित ऊर्जा का प्रयोग करें, पर यह आवश्यक नहीं है कि इलेक्ट्रिक वाहन ऊर्जा के स्रोत के रूप में सिर्फ बैटरी का ही प्रयोग करे| कई ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन है जिसमें लगी  मोटर किसी अन्य ऊर्जा स्रोत का भी प्रयोग करती है जिसको अलग-अलग नाम से जाना जाता है, इसके 3 प्रकार है:

#1. Battery Electric Vehicle (BEVs) – ये बैटरी में संग्रहीत ऊर्जा द्वारा संचालित होती हैं।

#2. Plug-in Hybird Electric Vehicle (PHEV) – ये बाहरी सॉकेट से चार्ज की गई बैटरी और आंतरिक दहन जैसे गैसोलीन, दोनों से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग करता है।

#3. Hybird Electric Vehicle (HEV) – इसमें ऊर्जा प्राप्त करने के लिए हाइड्रोजन से इलेक्ट्रॉन को अलग किया जाता है।

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन की आवश्यकता एवं भविष्य

  • जनवरी 2022 में प्रकाशित NITI Aayog और Rocky Mountain Institute (RMI) की रिपोर्ट भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल फाइनेंस बाजार में अपार संभावनाओं को देखती है, रिपोर्ट के अनुसार भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल फाइनेंस इंडस्ट्री 2030 तक 3.7 लाख करोड़ तक पहुचने की क्षमता है, इससे माना जा सकता है कि देश के परिवहन तंत्र में इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल का दखल काफी बढ़ सकता है।
  • भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा वाहन बाजार है, लेकिन यह बाजार वर्तमान में जीवाश्म ईंधन पर आधारित है| अगर भारत इसे इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के रूप में परिवर्तित करने में सफल रहा, तो यह इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के सुनहरे भविष्य का आगाज होगा।
  • IQAir की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व के 10 सबसे वायु प्रदूषित शहरों मे भारत के कुल 6 शहर शामिल थे, बड़े शहरों के साथ छोटे-छोटे शहरों में भी प्रदूषण की समस्या आम हो गई  हैं, यकीनन इलेक्ट्रिक वाहन इस समस्या का बेहतर समाधान हो सकते हैं।
  • भारत काफी बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधन को दूसरे देशों से खरीदा है, कुल खपत का लगभग 85% तेल हम दूसरे देश से आयात करते हैं, इसके उसके लिए काफी बड़ी राशि विदेशी मुद्रा के रूप में भुगतान स्वरूप देनी होती है|  इलेक्ट्रिक वाहन के प्रयोग से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को भी कम किया जा सकता है।

इलेक्ट्रिक व्हीकल को प्रोत्साहित करने में भारत सरकार के कदम

  • भारत सरकार ने फेम 2 (Faster Adoption and Manufacturing of Hybrid and Electric vehicle (FAME)) योजना में 2030 तक सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक व्हीकल की भागीदारी को 30% तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी प्लान (NEMMP) 2020 के तहत,  भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 400 मिलियन ग्राहकों तक इलेक्ट्रिक वाहन को पहुँचाना है।
  • चार्जिंग प्वाइंट को बढ़ावा देने के लिए इसे सर्विस कैटेगरी में शामिल किया गया है,  इसमें शामिल करने के बाद चार्जिंग स्टेशन को स्थापित करने के लिए किसी भी प्रकार के लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी।
  • राज्य और केंद्र सरकार बजट में इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन (Incentive) की घोषणा करते रहते हैं।
  • पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों पर जीएसटी दर को भी कम किया गया है।
  • कई राज्य सरकारें इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर सब्सिडी और रोड टैक्स पर छूट भी प्रदान करती है।
  • भारत में अमेजॉन (Amazon), स्विग्गी (Swiggy), जोमैटो (Zomato) जैसी कंपनियां डिलीवरी के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग धीरे धीरे बढ़ा रही हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों के लाभ और हानियां

लाभ

  • इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग से हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता है,  जिस कारण यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुचाते है।
  • परंपरागत ईंधन पर चलने वाले वाहनों की तुलना में इलेक्ट्रिक वाहन काफी कम शोर उत्पन्न करते हैं, जिस कारण यह वाहन पर्यावरण को ध्वनि प्रदूषण से भी मुक्त रखते हैं।
  • हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने के लिए भी बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन पेट्रोल या डीजल की लागत से बिजली की खपत की तुलना करने में इनकी लागत 25 से 30% तक कम आती है, जिस कारण यह आर्थिक रूप से भी लाभप्रद है।
  • पेट्रोल या डीजल भरवाने के लिए हमें घर से दूर पेट्रोल पंप तक जाना पड़ता है, परंतु इलेक्ट्रिक वाहन को घर पर भी चार्ज किया जा सकता है।

हानियां

  • जिस प्रकार पेट्रोल या डीजल की उपलब्धता बड़े शहरों से लेकर कस्बों तक आसानी से हो जाती है, देश में आज भी चार्जिंग स्टेशनों का काफी अभाव है इसी कारण लंबी दूरी के सफर में इलेक्ट्रिक वाहनों से यात्रा में कठिनाई होती है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने में काफी समय लगता है, यह इसके प्रयोग को जटिल बनाती है।
  • जीवाश्म ईंधन पर चलने वाले वाहन की अपेक्षा में इलेक्ट्रिक वाहनों का मूल्य काफी ज्यादा होता है।
  • इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी में लिथियम का प्रयोग होता है, भारत में लिथियम का काफी अभाव है, लिथियम के भंडार बोलिविया, अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों में हैं, जिस कारण भारत लिथियम के लिए इन देशों पर निर्भर है।
  • पारंपरिक वाहनों के कल पुर्जों (Spare Parts) में दूसरे देश पर हमारी निर्भरता 15% से 20% की है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन में यह निर्भरता 80% से अधिक की हो जाती है जिस कारण ज्यादातर कलपुर्जे हमें अन्य देशों से ही मंगाने पड़ते हैं उन्हें भारत में केवल जोड़ा (assemble) जाता  है।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माता कंपनियां

टाटा मोटर्स (Tata Motors)

  1. Tata Nexon EV

  2. Tata Tigor EV

महिंद्रा (Mahindra)

  1. Mahindra Ego Plus
  2. Mahindra eVerito
  3. Mahindra Treo

हीरो मोटोकॉर्प (Hero Motocorp)

  1. Hero Electric Dash
  2. Hero Electric Optima
  3. Hero Electric Atriq

अशोक लीलैंड (Ashok Leyland)

कंपनी आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसे बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही है।

हुंडई (Hyundai)

  1. Hyundai Kona
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